वो प्यारी थी माँ बाप की ,
भगवान को मनाते फिरते थे उसकी लंबी उम्र औ उसकी खुशहाली के लिए ...
उसे पुचकारते थे ,उसे सहलाते थे ,
उसे फूल सा सहेजा करते थे ,जो गलत राह पे चल दे तो बिछा देते थे खुद को की उसे कुछ ना हो
,वो हँसती तो खुश होते और वो रोती तो रो लेते ...
बस दुआ करते थे कि सब भला हो इस नन्ही सी परी का ,
जाने कितनी बार उसे रोका ,सम्हाला ,गिरने से बचाया ,
पापा ने कंधे पे घुमाया ,माँ ने कोख में पाला ,भाई समझाता रहा सिखाता रहा ,
जाने कब बड़ी हो गई ,समझदार ,खुद के निर्णय लेने वाली,
अब भी भगवान से उसकी खुश किस्मत की अनंत प्रार्थनाएँ की ,
बहुत समझाया कि राह गलत है ,
बस दर्द ही दर्द है ,
कांटे हैं इस रास्ते पे ,
विरह के रास्ते ,
खुद से सब से ,
ना सम्मान है इस निर्णय में ,
ना माँ बाप की खुशी ,
ना परिवार का साथ ,
वो चल पड़ी अलग से रास्ते पे ,अंधेरे से ,ऊबड़ खाबड़ ,अंजान रस्ते की तरफ ,
अपने भगवान को ठेंगा दिखा गई ,
छोड़ गई सबको पीछे रोता हुआ ,सिसकता हुआ ,
बिना बताए जाने क्यूँ ,बोली जी गई मैं ,
क्यूंकी उसके भगवान ने उसकी मुराद जो पूरी कर दी थी ,
जाने कैसे उसका भगवान ,
माँ बाप के भगवान से धोखा कर गया ,
मन्नतों में कलह हो गयी ,
दुआएं लड़ गई एक दूजे से ,
कि जाते जाते ,
वो जी गई ,
सबके लिए मर गई ,
कुछ सपने जी गए और बाकी
सब उसके लिए मर गए ...................................
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