क्यूँ तेरी तलाश करना खत्म नहीं होता ,
क्यूँ तेरी याद में रोना बंद नहीं होता ,
क्यूँ ये उम्मीद के साए हटते नहीं दिल से ,
क्यूँ ये दिल खुद को फिर से नहीं खोता ,
क्यूँ ये आँखें तेरे ख्वाब संजोती हैं ,
क्यूँ ये साँसे तेरे नाम को सुन के चुप पड़ जाती हैं ,
क्यूँ तुझे पाने की तमन्ना मेरे दिल को यूं ही पिघलाती है ,
क्यूँ तेरी याद हमेशा मुझको यू ही तडपाती है ,
क्यूँ हर रात मुझे ये अकेलापन खाता है ,
क्यूँ यह दिल तेरे नाम पे मुझको यूं ही भरमाता है,
क्यूँ हर सुबह तरसती है मेरी ,
और अधूरा सा मेरा दिन ढल जाता है ,
क्यूँ हर दिन तेरी याद के साथ ये चाँद मुझे भटकाता है ,
और क्यूँ मुझको ये अकेलापन ही भाता है ,
क्यूँ खुद से बातें करता हूँ ,
और क्यूँ झूंटी उम्मीद के पीछे ,यह दिल मुझको भटकाता है ,
यह जान के भी की नहीं है तू आस पास ,
न मिल सकेगा इस जहान में दोबारा मुझको ,
क्यूँ मेरा पागल सा मन ,
जब भी हो अकेला ,उदास ,गुमसुम ,
मुझको समझाता है ,बहलाता है ,
की तुम पहले और आखिरी थे ,
ना मिल सकोगे फिर कहीं ,
मान के यूं ही रुकना वाजिब नहीं ,
इसलिए यूं ही तेरी तलाश में दिल भटकता जाता है ,
क्यूंकि किसी दिन हो सकता है ,
अहसास हो तुझे ,मेरी उम्मीद और मोहब्बत का ,
मेरी चाहत ,और बेबसी का ,
जो आज भी तेरी याद के साथ ,
ये जिए जाता है ,दर्द के घूँट पिए जाता है ,
तू ना सही ,तेरी याद ही सही ,
हर धड़कन और अपनी हर सांस तेरे नाम किये जाता है !
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