Wednesday, March 26, 2014

उड़ान

मेरे पंख अब सहारा दे नहीं पाते ,मुझको की उड़ पाऊं फिर से ,

पुराने ख्वाब कुछ टूटे से ,कुछ पूरे से ,मदद नहीं करते उड़ने को,

वो जो साथ थे मेरे ,या जो छूट गए मुझसे ,

उम्मीद करूँ उनकी या ना करूँ ,कुछ समझ नहीं आता ,

फंसा हूँ आज भी अधर में कहीं ,के मेरे पास जवाब नहीं है ,

जाऊं कहाँ किस रस्ते पे ,

ना कोई साथ देने वाला बचा है ,

ना अब मुझे राह दिखाने वाला.........

और में जिए जा रहा हूँ ,उमीद में उसकी की मिलेगा इक दिन ,

जो फिर से देगा सहारा मुझको ....................उड़ने को ...............संग मेरे

No comments: