मेरे पंख अब सहारा दे नहीं पाते ,मुझको की उड़ पाऊं फिर से ,
पुराने ख्वाब कुछ टूटे से ,कुछ पूरे से ,मदद नहीं करते उड़ने को,
वो जो साथ थे मेरे ,या जो छूट गए मुझसे ,
उम्मीद करूँ उनकी या ना करूँ ,कुछ समझ नहीं आता ,
फंसा हूँ आज भी अधर में कहीं ,के मेरे पास जवाब नहीं है ,
जाऊं कहाँ किस रस्ते पे ,
ना कोई साथ देने वाला बचा है ,
ना अब मुझे राह दिखाने वाला.........
और में जिए जा रहा हूँ ,उमीद में उसकी की मिलेगा इक दिन ,
जो फिर से देगा सहारा मुझको ....................उड़ने को ...............संग मेरे
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