Friday, March 27, 2009

Am I Defeated ?

I've never backed away from a fight
Until now
I always get my way
Always
You should have never won

Somehow, though
You got your way
I've said it now
Told the truth for once

You brought this upon yourself
See me crying?
See how much this is hurting me?
You did this

Leave it at that

Just leave me be

Please

G
O

A
W
A
Y

You keep pushing me
You keep following me
You keep bringing this up
Again and again

Will you ever be satisfied?
How many tears will it take
Before you've had enough?
Gallons and gallons?
If you were a true friend
One would be enough

You said you were

Obviously
Not

Because a true friend
Would have seen me hurting
Been there
If I needed you to be
Held me
If I need that
Backed away
If I asked you to

You brought this upon yourself
See me crying?
See how much this is hurting me?
You did this

Leave it at that

Just leave me be

Please

G
O

A
W
A
Y

I've had enough
For one year
For one month
For one lifetime
Leave me be
Just get out
Just let me deal with this
Alone

I've had enough

Are you happy now?

You win

I've
Been
Defeated

Sunday, March 15, 2009

इश्क-ऐ-गुल

एक गुलाब को कांटे से प्यार हो गया ,
इश्क में ऐसा डूबा की कांटे से मिलके तार तार हो गया ,
फना हो गया इश्क में कांटे ने चोटें इतनी दीं ,
टूट के गिरा शाख से जमीन पे जार जार हो गया ,
टूट के भी कांटे को किया इश्क इस कदर,
मिला मिटटी में मिट गया ,
बेचारा इश्क में सुपुर्दे खाक हो गया,

गुनाह

हमने हर पल चाहा हर चाहत पूरी हो उनकी
जो वो चाहें उन्हें सब कुछ मिला हमें छोड़कर
कि सब खोकर जाना
हमें उन्होने कभी चाहा ही नहीं

अमितोम इश्क़ में फ़ना हो गया सब जान के भी इश्क़ में खो गया
ना चैन से जीता है ना साँसें लेता है ये इश्क़ उसके लिए गुनाह हो गया

नया दिन

वो अहसान किए जाते हैं
इश्क़ समझके हम ही बेखौफ़ ज़हर पिए जाते हैं
वो चले गाये दिल मेरा अहसानो तले रौंद कर
और हम आज भी मुर्दा जिए जाते हैं |

परवाना

कि हम पुंछते फिरते थे इश्क़ क्या होता है,
दिल कैसे जलता है ,
जब चोट खाई तोह समझ आया ,
क्यों चकोर चाँद को ताकता है,
औ क्यूं परवाना शमा में जलता है ,

एहसान

इश्क़ किया था ज़िंदगी को चाहा था
तम्मनायें हज़ारों थी इस दिल में
अब ना इश्क़ रहा ना चाहत
दोस्त हमें ये भी नहीं पता
इश्क़ था या अहसान हम पर

बेजान Jindagi

इस दिल का हाल क्या कहूँ
ये साँसें हर पल जार जार होती हैं
मेरी रूह काँपति है हर सूं
मेरी जान हर पल मौत से दो चार होती है
अमितोम

Maut

मौत

हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
यह साँसे झुंटी हैं ,वहम हैं सबके लिए ,
बिना रुके धड़कन ,कई बार जिंदगी से लड़ चूका हूँ मैं ,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
कभी मारा इश्क ने ,तोह कभी किस्मत ने मारा मुझे ,
बिना किसी दुश्मनी के ,जिंदगी से लड़ चूका हूँ मैं ,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
सवालों से लड़ता हूँ खुद के,जवाबों में उलझा रहता हूँ,
कमबख्त दिल ने मारा मुझे ,जिंदगी के कई पन्ने पढ़ चूका हूँ मैं ,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
दोस्त बनाता हूँ सबको धोखा खाने के लिए ,
घिरा रहता हूँ दोस्त,दुश्मनों से ,कई पायदान धोखे के चढ़ चूका हूँ मैं,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
अमितोम ना खुदी को रोया हैं ,ना खुदा पे,मानता है ,
जो होता है अच्छे के लिए होता है ,क्यूँ करे बहस या तवज्जो किसी से,
बस एक जिंदगी में ,हवा सा बह चूका हूं मैं ,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,
क्यूँ किसी को गलत कहें ,क्यूँ करें बदसलूकी किसी से ,
क्या दोस्तों से दोस्ती,दुश्मनों से नफरत ,क्यूँ कोसुं इश्क को ,
खता थी अमितोम की,
एक जख्म को कुरेदा है इतना ,की नासूर से पट चूका हूँ मैं,
हजारों दफा मर चूका हूँ मैं ,

चाहत

चाहत

नहीं जानता हूँ क्या खता की है मैंने ,
चाहा है चाँद को यह जानके भी की दाग है उस पर,
चाहा है चढ़ते सूरज को यह जानके भी की जल रहा है वो,
चाहा है नदी को यह जानके भी की वोह रुकती ही नहीं,
चाहा है समुन्दर को यह जानके भी की उसकी गहराई का कोई अंत ही नहीं,
चाहा है अपनी चाहत को यह जानके भी की कभी उसने हमें चाहा ही नहीं ,
आज भी परेशां हूँ मैं की क्या खता थी मेरी ,
यह की मैंने चाहत की,
या यह की सब जानके भी उसे चाह मैंने |
अमितोम कहाँ रोता है अब ,
रोए भी तोह कैसे ,
हर अश्क खो गया है उसका ,
आँखों पे आता कहाँ है ,
बहता रहता है हर सु ,
बदन में उसके लहू बनके |

Raahein

रास्ते

रास्ते हैं सबके पास ,सबको पता है कहाँ हैं जाना ,
लहरों को पता है साहिल का ,सूरज को पता है डूब जाना ,
भटक रहा हुआन आज भी ,इस अनजानी दुनिया में ,
ना राह पता हैं न है पता कहाँ है मुझे जाना |

अमितोम

Ham Tum

हम तुम ,साथ चले थे ,
कुछ तलाश थी हमें ,
पाना था कुछ हमें ,
मिलकर साथ चलकर ,
पता नहीं अब तक ,
क्या खोया क्या पाया ,
की तुम अब साथ नहीं ,
और हम बिना तुम्हारे ,
अनजानी राहों पे चले जा रहे हैं,
गुमनाम से,तड़पते हुए ,
खून के घूंट पिए जा रहे है,
अब भरोसा हुआ हमें ,
की तुम के बिना हम अधूरे हैं |
अमितोम

Raah

चल रहा हूँ अनजानी राहों पे ,
ना पता है रास्ता ना ठिकाना,
चले जा रहा हूँ ,जाने किसको ढूढ़ता हुआ ,
ना राह मिलेगी ना ठिकाना ,
कि हमें छोड़ दिया उन राहों पर साथ चलने वालों ने |

अमितोम

manjil

सोचा था साथ साथ चलेंगे दूर तक अपने रास्तों पे ,
देंगे साथ एक दूजे का ,हर पल हर सुख दुःख में ,
छोडा है साथ मेरा उसने उस पल पर ,
जब ग़म भूलकर हम खुशिया मानाने वाले थे........
अमितोम

yaad

ये यादें ना जाने कब आती हैं ,क्यूँ आती हैं,
ना भूले हैं हम उन्हें ना भूल पायेंगे ,
की वो सूरत उनकी हमारे जहें से कभी निकल नहीं पाती है,
भूलें उसे जो ना बसा हो दिल में मेरे ,याद करें उसे जो हट गया हो जहेन से मेरे ,
के वो अब नहीं है साथ पर उनकी परछाई आज भी हमें छूकर चली जाती है !
अमितोम

sajaa

क्या खोया क्या पाया ,भागता फिरा मैं हमेशा अपने आप से ,

सोचा सुकून से जियूँगा ,भागकर उन सब से जो मेरे हो ना सके ,

यह खुदा का रहम है मुझ पर या सजा मुझको ,समझ नहीं आता ,

की भागे थे जिससे वो आज भी परछाई की तरह साथ चला करते हैं |


अमितोम