Wednesday, March 26, 2014

सुना है मैंने की ,शब्दों में शक्ति होती है ,

सुना है मैंने की ,शब्दों में शक्ति होती है ,
वोह दुआएं ,किसी बीमार को नयी जिंदगी दे देती हैं ,
तो कहीं वोह प्रार्थना के स्वर ,
किसी को सब कुछ दिला देते हैं ,
और वोह आह निकली हुई किसी के मुह से ,
किसी का सब कुछ छीन लेती है ,
सुना है मैंने की शब्दों में शक्ति होती है,
 पर क्यूँ मेरी कोई उम्मीद पूरी ना हो सकी ,
क्यूँ मेरे शब्दों को तबज्जो न मिल सकी ,
जबकि मैंने चाहा था टूटकर तुमको ,
हर बार निकले जो अल्फाज मेरे मुह से ,
वो कहीं ना कहीं दिल की गहराइयों से निकले ,
अगर शब्दों में शक्ति होती है ,
तो क्यूँ मेरे शब्द तुम्हें मेरे पास रोक ना पाए ,
क्यूँ तुम मुझपर भरोसा न कर सके ,
और क्यूँ तुम दूर चले गए दूर मुझसे ,
पता नहीं कमी कहाँ थी मुझमे या मेरे शब्दों में ,
या जरुरत है मुझे भरोसा कर लेने की इस बात पे की मेरे शब्द निःशब्द से रह गए ,
बेअसर से क्यूंकि तुमने मुझे कभी सुना ही नहीं !


कोशिश हर बार की मैंने की कह दूं वोह सब जो दिल में है ,किसी से नफरत ,किसी से मोहब्बत ,किसी से अलगाव तो किसी से चाहत ,मगर वाह री दुनिया ,और एक निराला सा में ,जो बुरा बोला मुंह से उसे तो सबने सुना ,पर जो भला था मेरे अन्दर ,किसी ने झाँका भी नहीं ....................मेरी नफरत मेरी टीस मेरी कसमसाहट ,सब को दिख गयी बिना बोले ,और मेरे हँसते चेहरे के दर्द को किसी ने पढ़ा ही नहीं...................... 

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