हम तुम ,साथ चले थे ,
कुछ तलाश थी हमें ,
पाना था कुछ हमें ,
मिलकर साथ चलकर ,
पता नहीं अब तक ,
क्या खोया क्या पाया ,
की तुम अब साथ नहीं ,
और हम बिना तुम्हारे ,
अनजानी राहों पे चले जा रहे हैं,
गुमनाम से,तड़पते हुए ,
खून के घूंट पिए जा रहे है,
अब भरोसा हुआ हमें ,
की तुम के बिना हम अधूरे हैं |
अमितोम
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